ॐ जोरावर परमात्मने नमः
पावन प्राकट्य एवं तपोगाथा

इतिहास

परम पूज्य भगवान जोरावर जी महाराज का दिव्य अवतरण, भक्ति-साधना, लोक-कल्याण एवं पावन समाधि का प्रामाणिक वृत्तांत।

पावन प्राकट्य~130 वर्ष पूर्वचितौरा, धौलपुर रियासत
महासमाधि तिथि24 मार्च 1962दोपहर 12:00 बजे (सप्तदीप)
वार्षिक मेलाहोली पश्चात तीजविशाल श्रद्धालु समागम
प्रबंधन समितिसिद्ध श्री जोरावर धामCOOP/2023/DHOLPUR
01

जन्म और प्रारंभिक जीवन

परम पूज्य भगवान जोरावर जी महाराज का पावन अवतरण आज से करीब 130 वर्ष पूर्व तत्कालीन धौलपुर रियासत के अंतर्गत पावन ग्राम चितौरा में हुआ। बाल्यकाल से ही आपका मन सांसारिक प्रपंचों से विरक्त होकर ईश्वरीय चिंतन एवं लोक-कल्याण की ओर प्रवृत्त रहा। गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी आपने कठोर तप और निष्काम कर्म का अद्वितीय आदर्श प्रस्तुत किया।

02

भक्ति और साधना

महाराज श्री ने चितौरा की पवित्र धरा पर निरंतर ईश्वर आराधना और आत्म-साक्षात्कार की गूढ़ साधना की। उनके सान्निध्य में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को असीम मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति की अनुभूति होती थी। उन्होंने समाज को सत्य, अहिंसा, परोपकार और समभाव का दिव्य संदेश दिया।

03

जोरावर की दिव्य अनुभूतियां

महाराज श्री के पावन जीवनकाल में अनेक अलौकिक घटनाएं और जन-कल्याणकारी चमत्कार घटित हुए। क्षेत्र के असहाय, रोगी और विपत्तिग्रस्त लोग जब भी उनके द्वार आते, महाराज श्री के आशीर्वाद और पावन विभूति से उनके समस्त कष्ट दूर हो जाते। इन दिव्य अनुभूतियों ने जन-जन के हृदय में उनके प्रति अटूट श्रद्धा स्थापित की।

04

समाधि

अपने लौकिक जीवन के समस्त उद्देश्यों को पूर्ण कर परम पूज्य महाराज श्री ने 24 मार्च 1962 को दोपहर ठीक 12:00 बजे सप्तदीप के साक्षी में महासमाधि ली। उनका भौतिक शरीर यद्यपि शांत हुआ, किंतु उनकी दिव्य चेतना और कृपा आज भी इस पावन धाम में जीवंत रूप से प्रवाहित है।

05

भक्तों के अनुभव

समाधि के पश्चात भी अनगिनत भक्तों ने धाम की चौखट पर आकर अपने जीवन के संकटों से मुक्ति पाई है। असाध्य रोगों का निवारण, पारिवारिक सुख-शांति एवं मनोकामनाओं की पूर्ति के संबंध में श्रद्धालुओं के प्रत्यक्ष अनुभव धाम की अलौकिक सत्ता का साक्षात प्रमाण हैं।

06

मेला और धार्मिक परंपरा

धाम में प्रत्येक माह की मासिक तिथि पर श्रद्धालु दर्शन हेतु एकत्र होते हैं। विशेष रूप से प्रतिवर्ष रंगों के पावन पर्व होली के पश्चात तृतीया (तीज) को धाम में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित संपूर्ण भारतवर्ष से लाखों श्रद्धालु दर्शनार्थ पधारते हैं।

07

वर्तमान सिद्ध श्री जोरावर धाम

आज चितौरा स्थित यह धाम एक जाग्रत तीर्थ के रूप में प्रतिष्ठित है। पंजीकृत संस्था 'सिद्ध श्री जोरावर धाम सेवा समिति' के मार्गदर्शन में यहाँ दर्शन, पूजा-अर्चना, नित्य अन्नक्षेत्र, स्वच्छता एवं जन-सुविधाओं का सुचारु संचालन किया जा रहा है।

08

मंदिर निर्माण का संकल्प

बढ़ती श्रद्धालु संख्या और पवित्र धाम की भव्यता के अनुरूप अब एक विशाल, कलात्मक एवं सुदृढ़ मंदिर संरचना के निर्माण का संकल्प लिया गया है। यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अमर केंद्र बनेगा।

भौगोलिक स्थिति एवं दूरियां

प्रमुख नगरों से धाम की दूरी

धौलपुर शहर25 कि.मी.
आगरा (उ.प्र.)60 कि.मी.
ग्वालियर (म.प्र.)90 कि.मी.
भरतपुर95 कि.मी.